Bajrang Baan

बजरंग बाण (Bajrang Baan Lyrics hindi ): अर्थ, पाठ की सही विधि और इसके अचूक तांत्रिक व आध्यात्मिक लाभ

प्रस्तावना

॥ जय श्री राम ॥
॥ जय बजरंगबली ॥

सनातन धर्म में भगवान हनुमान को शक्ति, साहस, सेवा और अटूट भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए भक्त विभिन्न स्तोत्रों और पाठों का सहारा लेते हैं, जिनमें बजरंग बाण का विशेष स्थान है। यह एक लोकप्रिय धार्मिक रचना है, जिसका पाठ लाखों श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।

बजरंग बाण में भगवान हनुमान की महिमा, उनके पराक्रम और प्रभु श्रीराम के प्रति उनके समर्पण का सुंदर वर्णन मिलता है। यही कारण है कि यह पाठ हनुमान भक्तों के बीच अत्यंत प्रिय माना जाता है। कई लोग मंगलवार, शनिवार और अन्य धार्मिक अवसरों पर बजरंग बाण का पाठ अपनी दैनिक साधना का हिस्सा बनाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान का स्मरण व्यक्ति को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान करने में सहायक माना जाता है। बजरंग बाण का पाठ भी इसी भक्ति भावना को मजबूत करने का एक माध्यम है।

इस लेख में हम आपको बजरंग बाण के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स, उसका धार्मिक महत्व, पाठ करने की सामान्य विधि तथा उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध करा रहे हैं।

बजरंग बाण का महत्व

बजरंग बाण भगवान हनुमान की आराधना से जुड़ा एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। श्रद्धालु इसे भक्ति, समर्पण और भगवान के प्रति अपने विश्वास को व्यक्त करने के लिए पढ़ते हैं।

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि वे अपने भक्तों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। बजरंग बाण का पाठ करते समय भक्त भगवान हनुमान का स्मरण करते हुए उनसे जीवन में सही मार्गदर्शन, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक दृष्टि से यह पाठ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति माना जाता है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा और एकाग्रता के साथ इसका पाठ करता है, तो उसके मन में भक्ति का भाव और अधिक प्रबल हो सकता है।


बजरंग बाण लिरिक्स हिंदी में


बजरंग बाण

॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते,
बिनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥
जय हनुमंत संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ॥

जन के काज बिलंब न कीजै ।
आतुर दौरि महा सुख दीजै ॥

जैसे कूदि सिंधु महिपारा ।
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ॥

आगे जाय लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुरलोका ॥

जाय बिभीषन को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परमपद लीन्हा ॥

बाग उजारि सिंधु महँ बोरा ।
अति आतुर जमकातर तोरा ॥

अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेटि लंक को जारा ॥

लाह समान लंक जरि गई ।
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई ॥

अब बिलंब केहि कारन स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ॥

जय जय लखन प्राण के दाता ।
आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता ॥

जै गिरिधर जै जै सुख सागर ।
सुर-समूह-समरथ भटनागर ॥

ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले ।
बैरिहि मारु बज्र की कीले ॥

गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।
महाराज प्रभु दास उबारो॥

ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो ।

ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीशा ।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा ॥

सत्य होहु हरि शपथ पायके ।
राम दूत धरु मारु जाय के ॥

जय जय जय हनुमंत अगाधा ।
दुःख पावत जन केहि अपराधा ॥

पूजा जप तप नेम अचारा ।
नहिं जानत हौं दास तुम्हारा ॥

वन उपवन मग गिरि गृह माहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ॥

पांय परौं कर जोरि मनावौं ।
येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥

जय अंजनि कुमार बलवंता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ॥

बदन कराल काल कुल घालक ।
राम सहाय सदा प्रतिपालक ॥

भूत, प्रेत, पिशाच निशाचर ।
अग्नि बेताल काल मारी मर ॥

इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की ।
राखउ नाथ मरजाद नाम की ॥

जनकसुता हरि दास कहावो ।
ताकी शपथ बिलंब न लावो ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा ।
सुमिरत होय दुसह दुःख नाशा ॥

चरण शरण कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई ।
पाँय परौं, कर जोरि मनाई ॥

ॐ चं चं चं चं चपल चलंता ।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ॥

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल ।
ॐ सं सं सहमि पराने खल दल ॥

अपने जन को तुरत उबारो ।
सुमिरत होय आनंद हमरो ॥

यह बजरंग बाण जेहि मारै ।
ताहि कहो फिरि कौन उबारै ॥

पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करै प्रान की ॥

यह बजरंग बाण जो जापै ।
ताते भूत-प्रेत सब कापैं ॥

धूप देय जो जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेशा ॥

॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै,
सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ,
सिद्ध करैं हनुमान ॥

बजरंग बाण पाठ करने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें

1. श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें

किसी भी धार्मिक पाठ की तरह बजरंग बाण का पाठ भी शांत मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

2. स्वच्छता का ध्यान रखें

पाठ से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है।

3. शांत वातावरण चुनें

ऐसे स्थान का चयन करें जहाँ मन आसानी से एकाग्र हो सके और पूजा का वातावरण बना रहे।

4. भगवान का स्मरण करें

पाठ प्रारंभ करने से पहले भगवान श्रीराम और हनुमान जी का ध्यान करना लाभदायक माना जाता है।

5. नियमितता बनाए रखें

यदि संभव हो तो नियमित रूप से पाठ करें। भक्ति में निरंतरता को विशेष महत्व दिया गया है।


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निष्कर्ष

बजरंग बाण भगवान हनुमान की भक्ति और स्मरण का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। यह भक्तों को भगवान के प्रति श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की भावना से जोड़ने का कार्य करता है। जब इसका पाठ सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया जाता है, तो व्यक्ति अपने आध्यात्मिक जीवन में अधिक शांति, सकारात्मकता और आत्मविश्वास का अनुभव कर सकता है।

भगवान हनुमान की भक्ति हमें सेवा, विनम्रता, साहस और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण का संदेश देती है। यही बजरंग बाण का वास्तविक सार भी है।

॥ जय श्री राम ॥
॥ जय हनुमान ॥
॥ जय बजरंगबली ॥