Shree Durga Kavach Lyrics Hindi

दुर्गा कवच लिरिक्स (Durga Kavach Lyrics in Hindi): अर्थ और पाठ की सम्पूर्ण विधि

प्रस्तावना: माँ की शक्ति का सुरक्षा कवच जय माता दी! हम सभी के जीवन में कभी न कभी ऐसा समय आता है जब हमें चारों ओर से संकट घेरे हुए महसूस होते हैं। ऐसे समय में शास्त्रों में माँ दुर्गा का एक ऐसा स्तोत्र बताया गया है, जो मनुष्य के लिए ‘अजेय कवच’ का काम करता है। इसे हम ‘दुर्गा कवच’ कहते हैं। यह मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है और श्री दुर्गा सप्तशती के मुख्य अंगों में से एक है।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको दुर्गा कवच के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, ताकि आप माँ की असीम शक्ति का लाभ उठा सकें।


1. श्री दुर्गा कवच का महत्व (Importance)

दुर्गा कवच का पाठ करने का अर्थ है—अपने शरीर के हर अंग की रक्षा के लिए माँ के विभिन्न स्वरूपों को आमंत्रित करना। इसमें सिर से लेकर पैर तक, और यहाँ तक कि हमारे मन और बुद्धि की रक्षा के लिए भी विशिष्ट देवियों का आह्वान किया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति शुद्ध मन से इसका पाठ करता है, उसे तीनों लोकों में कोई भी पराजित नहीं कर सकता।


2. श्री दुर्गा कवच (हिंदी लिरिक्स) – Durga Kavach Lyrics

 

ऋषि मारकंडे ने पूछा जभी !
दया करके ब्रह्माजी बोले तभी !!
कि जो गुप्त मंत्र है संसार में !
हैं सब शक्तियां जिसके अधिकार में !!
हर इक का जो कर सकता उपकार है !
जिसे जपने से बेडा ही पार है !!
पवित्र कवच दुर्गा बलशाली का !
जो हर काम पूरा करे सवाली का !!
सुनो मारकंडे मैं समझाता हूँ !
मैं नवदुर्गा के नाम बतलाता हूँ !!
कवच की मैं सुन्दर चौपाई बना !
जो अत्यंत है गुप्त देऊं बता !!
नव दुर्गा का कवच यह, पढे जो मन चित लाये !
उस पे किसी प्रकार का, कभी कष्ट न आये !!

कहो जय जय महारानी की !
जय दुर्गा अष्ट भवानी की !!

पहली शैलपुत्री कहलावे ! दूसरी ब्रह्मचरिणी मन भावे !!
तीसरी चंद्रघंटा शुभनाम ! चौथी कुश्मांड़ा सुख धाम !!
पांचवी देवी स्कंद माता ! छटी कात्यायनी विख्याता !!
सातवी कालरात्रि महामाया ! आठवी महागौरी जगजाया !!
नौवी सिद्धिधात्रि जग जाने ! नव दुर्गा के नाम बखाने !!
महासंकट में वन में रण में ! रोग कोई उपजे जिन तन में !!
महाविपत्ति में व्योहार में ! मान चाहे जो राज दरबार में !!
शक्ति कवच को सुने सुनाये ! मनोकामना सिद्धि नर पाए !!
चामुंडा है प्रेत पर, वैष्णवी गरुड़ सवार ! बैल चढी महेश्वरी, हाथ लिए हथियार !!

कहो जय जय जय महारानी की !
जय दुर्गा अष्ट भवानी की !!

हंस सवारी वाराही की ! मोर चढी दुर्गा कौमारी !!
लक्ष्मी देवी कमल आसीना ! ब्रह्मी हंस चढी ले वीणा !!
ईश्वरी सदा करे बैल सवारी ! भक्तन की करती रखवारी !!
शंख चक्र शक्ति त्रिशुला ! हल मूसल कर कमल के फ़ूला !!
दैत्य नाश करने के कारण ! रुप अनेक कीन है धारण !!
बार बार चरण सीस नवाऊं ! जगदम्बे के गुण को गाऊँ !!
कष्ट निवारण बलशाली माँ ! दुष्ट संघारण महाकाली माँ !!
कोटि कोटि माता प्रणाम ! पूर्ण कीजो मेरे काम !!
दया करो बलशालिनी, दास के कष्ट मिटाओ !
मेरी रक्षा को सदा, सिंह चढी माँ आओ !!

कहो जय जय जय महारानी की !
जय दुर्गा अष्ट भवानी की !!

अग्नि से अग्नि देवता ! पूर्व दिशा में ऐन्द्री !!
दक्षिण में वाराही मेरी ! नैऋत्य में खडग धारिणी !!
वायु से माँ मृगवाहिनी ! पश्चिम में देवी वारुणी !!
उत्तर में माँ कौमारी जी ! ईशान में शूल धारी जी !!
ब्रह्माणी माता अर्श पर ! माँ वैष्णवी इस फर्श पर !!
चामुंडा दस दिशाओं में, हर कष्ट तुम मेरा हरो !
संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!

सन्मुख मेरे देवी जया ! पाछे हो माता विजया !!
अजिता खड़ी बाएं मेरे ! अपराजिता दायें मेरे !!
उद्योतिनी माँ शिखा की ! माँ उमा देवी सिर की ही !!
माला धारी ललाट की, और भृकुटि की माँ यशस्वनी !
भृकुटि के मध्य त्रयनेत्रा, यम घंटा दोनो नासिका !!
काली कपोलों की कर्ण, मूलों की माता शंकरी !
नासिका में अंश अपना, माँ सुगंधा तुम धरो !!
संसार में माता मेरी, रक्षा करो रक्षा करो !!

ऊपर व नीचे होठों की ! माँ चर्चका अमृतकली !!
जीभा की माता सरस्वती ! दांतों की कौमारी सती !!
इस कंठ की माँ चण्डिका ! और चित्रघंटा घंटी की !!
कामाक्षी माँ ठोड़ी की ! माँ मंगला इस वाणी की !!
ग्रीवा की भद्रकाली माँ ! रक्षा करे बलशाली माँ !!
दोनो भुजाओं की मेरे, रक्षा करे धनु धारणी !
दो हाथों के सब अंगों की, रक्षा करे जगतारणी !!
शूलेश्वरी, कूलेश्वरी, महादेवी शोक विनाशानी !
छाती स्तनों और कन्धों की, रक्षा करे जगवासिनी !!
हृदय उदर और नाभि के, कटि भाग के सब अंगों की !
गुह्येश्वरी माँ पूतना, जग जननी श्यामा रंग की !!
घुटनों जन्घाओं की करे रक्षा वो विंध्यवासिनी !
टखनों व पाँव की करे रक्षा वो शिव की दासनी !!
रक्त मांस और हड्डियों से जो बना शरीर !
आतों और पित वात में, भरा अग्न और नीर !!
बल बुद्धि अंहकार और, प्राण अपान समान !
सत, रज, तम के गुणों में फँसी है यह जान !!
धार अनेकों रुप ही रक्षा करियो आन !
तेरी कृपा से ही माँ सब का है कल्याण !!
आयु यश और कीर्ति धन सम्पति परिवार !
ब्रह्माणी और लक्ष्मी, पार्वती जगतार !!
विद्या दे माँ सरस्वती सब सुखों की मूल !
दुष्टों से रक्षा करो हाथ लिए त्रिशूल !!

भैरवी मेरे जीवन साथी की, रक्षा करो हमेश !
मान राज दरबार में देवें सदा नरेश !!

यात्रा में दुःख कोई न, मेरे सिर पर आये !
कवच तुम्हारा हर जगह, मेरी करे सहाये !!
ऐ जग जननी कर दया, इतना दो वरदान !
लिखा तुम्हारा कवच यह, पढे जो निश्चय मान !!
मनवांछित फल पाए वो, मंगल मोद बसाए !
कवच तुम्हारा पढ़ते ही, नवनिधि घर आये !!
ब्रह्माजी बोले सुनो मारकंडे!
यह दुर्गा कवच मैंने तुमको सुनाया !!
रहा आज तक था गुप्त भेद सारा !
जगत की भलाई को मैंने बताया !!
सभी शक्तियां जग की करके एकत्रित !
है मिट्टी की देह को इसे जो पहनाया !!
मैं जिसने श्रद्धा से इसको पढ़ा जो !
सुना तो भी मुह माँगा वरदान पाया !!
जो संसार में अपने मंगल को चाहे !
तो हरदम यही कवच गाता चला जा !!
बियावान जंगल दिशाओं दशों में !
तू शक्ति की जय जय मनाता चला जा !!
तू जल में, तू थल में, तू अग्नि पवन में !
कवच पहन कर मुस्कुराता चला जा !!
निडर हो विचर मन जहाँ तेरा चाहे !
अपने कदम आगे बढ़ता चला जा !!
तेरा मान धन धाम इससे बढेगा !
तू श्रद्धा से दुर्गा कवच को जो गाए !!
यही मंत्र, यन्त्र यही तंत्र तेरा !
यही तेरे सिर से है संकट हटायें !!
यही भूत और प्रेत के भय का नाशक !
यही कवच श्रद्धा व भक्ति बढ़ाये !!
इसे निसदिन श्रद्धा से पढ़ कर !
जो चाहे तो मुह माँगा वरदान पाए !!
इस कवच को प्रेम से जो पढे !
कृपा से आदि भवानी की, बल और बुद्धि बढे !!
श्रद्धा से जपता रहे, जगदम्बे का नाम !
सुख भोगे संसार में, अंत मुक्ति सुखधाम !!
कृपा करो मातेश्वरी, बालक मैं नादान !
तेरे दर पर आ गिरा, करो मैय्या कल्याण !!
!! जय माता दी !!

3. दुर्गा कवच पाठ करने की सही विधि

महेंद्र जी, लिरिक्स देने के बाद पाठकों को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि पाठ कैसे करें, ताकि उन्हें पूरा फल मिले:

  1. शुद्धि: सुबह स्नान के बाद साफ़ या लाल रंग के वस्त्र पहनें।

  2. आसन: कुश या ऊनी आसन का प्रयोग करें।

  3. दीपक: माँ के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं।

  4. संकल्प: पाठ शुरू करने से पहले मन में अपनी सुरक्षा या जो भी कष्ट है, उसके निवारण का संकल्प लें।

  5. उच्चारण: संस्कृत के शब्दों को स्पष्ट बोलें। यदि संस्कृत कठिन लगे, तो आप इसका हिंदी अनुवाद भी पढ़ सकते हैं।


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4. नियमित पाठ के 10 बड़े फायदे

  • नकारात्मकता से बचाव: बुरी नज़र और टोने-टोटके का असर खत्म हो जाता है।

  • मानसिक शांति: तनाव और डिप्रेशन कम होता है।

  • रोगों से मुक्ति: शरीर के विभिन्न अंगों की रक्षा के मंत्र होने के कारण स्वास्थ्य बेहतर होता है।

  • आत्मविश्वास: व्यक्ति के भीतर साहस और निडरता आती है।

  • शत्रु विजय: गुप्त शत्रु आपका अहित नहीं कर पाते।

  • ग्रह शांति: कुंडली के अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होता है।

  • पारिवारिक सुख: घर में कलह शांत होती है और प्रेम बढ़ता है।

  • अकाल मृत्यु से रक्षा: देवी की कृपा से दुर्घटनाओं का योग टल जाता है।

  • कार्य में सफलता: रुके हुए काम फिर से गति पकड़ने लगते हैं।

  • मोक्ष की प्राप्ति: आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है।


5. विशेष सावधानियां

  • पाठ करते समय बीच में किसी से बात न करें।

  • श्रद्धा और विश्वास के बिना किया गया पाठ निष्फल रहता है।

  • मांसाहार और नशीली वस्तुओं का पूरी तरह त्याग करें।


6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या दुर्गा कवच को केवल नवरात्रि में ही पढ़ना चाहिए? नहीं, आप इसे रोज़ाना अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बना सकते हैं।

Q2. क्या इसे रात में पढ़ सकते हैं? हाँ, रात के समय किया गया पाठ शत्रुओं और तंत्र बाधाओं पर बहुत जल्दी असर करता है।

Q3. क्या इसे सुनने मात्र से लाभ मिलता है? हाँ, यदि आप पाठ नहीं कर सकते, तो इसे ध्यान से सुनना भी बहुत लाभकारी होता है।


7. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: दुर्गा कवच का पाठ करने के बाद अंत में माँ दुर्गा की आरती ज़रूर करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप पाठ के समय अपने पास एक कलश में जल भरकर रखते हैं और पाठ के बाद उस जल का छिड़काव अपने घर के हर कोने में करते हैं, तो घर की ‘Negative Energy’ तुरंत बाहर चली जाती है और सुख-शांति का अनुभव होता है।”


8. निष्कर्ष

माँ दुर्गा का यह कवच भक्तों के लिए एक ऐसा वरदान है, जिसे अपनाकर कोई भी मनुष्य निर्भय हो सकता है। यदि आप इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं, तो माँ स्वयं आपकी रक्षक बन जाती हैं।

आशा है कि Pujapath.net पर दिए गए ये लिरिक्स और जानकारी आपके काम आएगी। कमेंट में “जय माता दी” लिखकर अपनी हाज़िरी ज़रूर लगाएं!