प्रस्तावना: हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा… जय श्री श्याम! राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू धाम पूरी दुनिया में करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक के महान बलिदान से प्रसन्न होकर उन्हें अपना नाम ‘श्याम’ दिया था और वरदान दिया था कि कलियुग में वे उनके नाम से पूजे जाएंगे। खाटू श्याम जी की आरती का नियमित गान करने से जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको बाबा श्याम की प्रसिद्ध आरती के लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही उनके पूजन के विशेष नियमों के बारे में भी जानकारी देंगे।
1. श्री खाटू श्याम जी की आरती (Lyrics in Hindi)
आरती:
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
रतन जड़ित सिंहासन,
सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो,
कुण्डल श्रवण पड़े ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
गल पुष्पों की माला,
सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर,
दीपक ज्योति जले ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
मोदक खीर चूरमा,
सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत,
सेवा नित्य करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
झांझ कटोरा और घडियावल,
शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे,
जय-जयकार करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
जो ध्यावे फल पावे,
सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से,
श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
श्री श्याम बिहारी जी की आरती,
जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन,
मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
जय श्री श्याम हरे,
बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने,
पूरण काज करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
ॐ जय श्री श्याम हरे,
बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,
अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे…॥
श्री श्याम विनती: हाथ जोड़ विनती करू तो सुनियो चित्त लगाये!
2. खाटू श्याम पूजन और आरती की सही विधि
बाबा श्याम की पूजा बहुत ही सरल है, वे केवल भाव के भूखे हैं। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:
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समय: बाबा की आरती सुबह और शाम, दोनों समय की जा सकती है। फाल्गुन मेले और शुक्ल पक्ष की एकादशी व द्वादशी को इनकी पूजा का अनंत महत्व है।
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भोग: बाबा श्याम को चूरमा, खीर और माखन-मिश्री का भोग अत्यंत प्रिय है।
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इत्र: आरती के समय बाबा को गुलाब या केवड़े का इत्र अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
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दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और मोर पंख (मोरछड़ी) को अपने पास रखें।
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जयकारा: आरती के बाद “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” और “जय श्री श्याम” का जयकारा श्रद्धापूर्वक लगाएं।
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3. बाबा श्याम की आरती के 10+ चमत्कारिक लाभ (Benefits)
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हारे का सहारा: जब व्यक्ति हर तरफ से निराश हो जाता है, तो बाबा श्याम उसे नया रास्ता दिखाते हैं।
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मानसिक शांति: आरती के श्रवण और गान से तनाव और चिंता दूर होती है।
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आर्थिक उन्नति: घर में दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार में बरकत आती है।
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ग्रह शांति: बाबा श्याम की कृपा से राहु और शनि जैसे क्रूर ग्रहों का प्रभाव कम होता है।
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मनोकामना पूर्ति: सच्चे मन से की गई अरदास बाबा कभी खाली नहीं जाने देते।
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पारिवारिक सुख: घर में खुशहाली और प्रेम बना रहता है।
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रोग मुक्ति: शारीरिक कष्टों और असाध्य रोगों में राहत मिलती है।
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भय का नाश: शत्रुओं का भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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भक्ति की प्राप्ति: श्री कृष्ण के चरणों में अटूट प्रेम और भक्ति बढ़ती है।
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वंश वृद्धि: घर में योग्य संतान का आगमन होता है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. बाबा श्याम को नीले घोड़े वाला क्यों कहते हैं? बर्बरीक का घोड़ा नीला था, इसलिए बाबा श्याम को ‘नीले घोड़े वाला’ (Leela ka Aswar) कहा जाता है।
Q2. क्या घर में खाटू श्याम की फोटो रख सकते हैं? जी हाँ, घर के मंदिर में बाबा श्याम की मुस्कुराती हुई तस्वीर रखना बहुत शुभ होता है।
Q3. एकादशी व्रत का क्या महत्व है? खाटू श्याम जी के भक्त शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखते हैं, क्योंकि इसी दिन बाबा ने अपना शीश दान किया था।
5. विशेष सुझाव
“विशेष सुझाव: बाबा श्याम की आरती के बाद ‘मोरछड़ी’ (मोर पंख का झाड़ा) अपने सिर पर लगवाएं या स्वयं मोर पंख से अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जो भक्त बाबा को ‘गुलाब के फूल’ अर्पित करते हैं, उनके जीवन की सुगंध कभी फीकी नहीं पड़ती। याद रखें, बाबा श्याम को ‘शीश का दानी’ कहा जाता है, इसलिए उनके सामने अपना अहंकार त्याग कर ही जाएं।”
6. निष्कर्ष: अटूट विश्वास का नाम है श्याम
खाटू श्याम जी की आरती केवल शब्द नहीं, बल्कि एक पुकार है। जो भक्त हार मान चुका है, उसके लिए बाबा श्याम की चौखट आज भी चमत्कार दिखाती है।
आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को खुशियों से भर देगी। कमेंट में “जय श्री श्याम” ज़रूर लिखें!

महेंद्र कौशिक
Founder & Content Writer, PujaPath.net
📍 भारत | ✍️ 2022 से लिख रहे हैं
🕉️ वैदिक परंपरा
📖 भक्ति साहित्य
🌸 हिंदी लेखन
🔱 धार्मिक कंटेंट
🐚 बंगाली पूजा
✍️ मेरे बारे में
नमस्ते! मैं महेंद्र कौशिक हूँ — एक ऐसा इंसान जो बचपन से धर्म और भक्ति में डूबा रहा। मेरी दादी माँ हर सुबह 4 बजे उठकर पूजा करती थीं, और उनकी उस दिनचर्या ने मुझ पर जो छाप छोड़ी, वो आज तक है।
पढ़ाई और काम के साथ-साथ मैंने हमेशा यह महसूस किया कि इंटरनेट पर हिंदी में सही और विश्वसनीय धार्मिक जानकारी ढूंढना बहुत मुश्किल है। या तो जानकारी बहुत कठिन भाषा में होती है, या अधूरी होती है। तभी मैंने 2022 में PujaPath.net शुरू किया।
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