Shri Bajrang Baan

श्री बजरंग बाण (Shri Bajrang Baan): अर्थ, पाठ की सही विधि और अचूक लाभ

प्रस्तावना: निश्चय प्रेम प्रतीति ते… जय श्री राम! जय बजरंगबली! हनुमान जी की स्तुति में ‘हनुमान चालीसा’ के बाद जिस पाठ का नाम सबसे श्रद्धा और डर के साथ लिया जाता है, वह है ‘बजरंग बाण’। इसे ‘बाण’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका प्रभाव कभी खाली नहीं जाता। जहाँ हनुमान चालीसा एक विनती है, वहीं बजरंग बाण हनुमान जी को दी गई उनके प्रभु श्री राम की ‘शपथ’ है। यह अत्यंत शक्तिशाली और तीव्र प्रभाव वाला स्तोत्र है।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको बजरंग बाण के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इसके पाठ से जुड़ी उन सावधानियों के बारे में भी बताएंगे जिन्हें जानना हर भक्त के लिए अनिवार्य है।


1. बजरंग बाण का आध्यात्मिक महत्व (Significance)

बजरंग बाण का मुख्य उद्देश्य शत्रुओं का नाश, गंभीर रोगों से मुक्ति और प्राणों की रक्षा करना है। इसमें हनुमान जी को उन वचनों की याद दिलाई जाती है जो उन्होंने त्रेतायुग में प्रभु राम को दिए थे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती, ढैया या राहु-केतु के भयंकर प्रकोप से गुजर रहा होता है, तब बजरंग बाण उसके लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। यह पाठ मानसिक डर और तंत्र-मंत्र जैसी नकारात्मक शक्तियों को जड़ से खत्म कर देता है।


2. श्री बजरंग बाण (Full Lyrics in Hindi)


दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

चौपाई


जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।

जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।

गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।

जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।

वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।

जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।

बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।

इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।

जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।

ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।

अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।

ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।

हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।

जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।

जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।

ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।

विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।।
तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।

यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।

एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।

मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।

डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।

प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।।

दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।

शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।

दोहा


प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।

3. बजरंग बाण पाठ की सही और गुप्त विधि (Important Method)

बजरंग बाण का पाठ ‘हनुमान चालीसा’ की तरह रोज सामान्य रूप से नहीं करना चाहिए। Pujapath.net की इस विधि का विशेष ध्यान रखें:

  1. संकल्प: इसका पाठ केवल तब करें जब समस्या बहुत गंभीर हो। हाथ में जल लेकर अपनी समस्या बोलें और हनुमान जी से सहायता मांगें।

  2. समय: रात्रि का समय (9 बजे के बाद) या ब्रह्म मुहूर्त इसके लिए श्रेष्ठ है। मंगलवार या शनिवार से शुरू करना उत्तम रहता है।

  3. आसन और वस्त्र: लाल रंग के वस्त्र धारण करें और कुश के आसन पर बैठें।

  4. दीपक: चमेली के तेल का दीपक जलाएं और उसमें दो लौंग डाल दें।

  5. सात्विकता: पाठ के दिनों में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज) लें।


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4. बजरंग बाण के 15+ अचूक लाभ (Benefits)

नियमित और श्रद्धा से संकल्प लेकर पाठ करने पर ये लाभ मिलते हैं:

  1. शत्रु बाधा का नाश: ज्ञात और अज्ञात शत्रुओं का प्रभाव खत्म हो जाता है।

  2. तंत्र-बाधा से मुक्ति: जादू-टोना या बुरी नजर का असर तुरंत समाप्त होता है।

  3. भयानक रोगों में राहत: असाध्य बीमारियों में भी यह संजीवनी की तरह काम करता है।

  4. शनि दोष से मुक्ति: साढ़ेसाती और ढैया के कष्टों में भारी कमी आती है।

  5. कर्ज से छुटकारा: रुका हुआ धन वापस मिलता है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।

  6. अनजाने भय का अंत: यदि रात को डर लगता है, तो यह साहस प्रदान करता है।

  7. ग्रह शांति: मंगल, शनि और राहु के दोषों का निवारण होता है।

  8. आत्मविश्वास: व्यक्ति के व्यक्तित्व में ओज और तेज बढ़ता है।

  9. रुके हुए कार्य: कोर्ट-कचहरी या जमीन के अटके मामले सुलझने लगते हैं।

  10. नौकरी और व्यापार: कार्यस्थल पर आने वाली अड़चनें दूर होती हैं।

  11. विवाह बाधा: यदि मंगल दोष के कारण विवाह नहीं हो रहा, तो यह फलदायी है।

  12. दोषों का शमन: जाने-अनजाने में हुई गलतियों का प्रायश्चित होता है।

  13. मानसिक मजबूती: डिप्रेशन और चिंता जैसी स्थितियों में मन को बल देता है।

  14. बच्चों की सुरक्षा: बच्चों को बुरी नज़र और डर से बचाने के लिए।

  15. साधना की सिद्धि: आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों के लिए एकाग्रता बढ़ती है।


5. विशेष सावधानी (A Warning for Readers)

महेंद्र जी, पाठकों को यह स्पष्ट रूप से बताएं:

  • बजरंग बाण का प्रयोग किसी का बुरा करने के लिए कभी न करें।

  • हनुमान जी को ‘राम शपथ’ दी जाती है, इसलिए छोटी-छोटी बातों या स्वार्थ के लिए इसे न पढ़ें।

  • जब कोई रास्ता न बचे, तभी इसका सहारा लें।


6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या बजरंग बाण का पाठ रोज कर सकते हैं? शास्त्रों के अनुसार, इसे विशेष प्रयोजन के लिए ही पढ़ना चाहिए। दैनिक पूजा के लिए हनुमान चालीसा ही सर्वोत्तम है।

Q2. क्या महिलाएं बजरंग बाण पढ़ सकती हैं? जी हाँ, महिलाएं बजरंग बाण पढ़ सकती हैं, बस प्रतिमा का स्पर्श न करें और नियमों का पालन करें।

Q3. पाठ के बाद क्या करना चाहिए? पाठ के बाद हनुमान जी को ‘बूंदी’ या ‘गुड़-चने’ का भोग लगाएं और प्रभु राम के नाम का जाप करें।


7. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: बजरंग बाण का पाठ करने के बाद हनुमान जी को ‘सिंदूरी चोला’ चढ़ाने का संकल्प लें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि पाठ के दौरान अपने सामने तांबे के लोटे में जल भरकर रखें और पाठ के बाद उस जल को घर में छिड़कें और खुद भी पिएं। इससे घर की नकारात्मकता तुरंत भाग जाती है। ध्यान रखें, पाठ के समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए।”


8. निष्कर्ष: संकटमोचन की परम शक्ति

बजरंग बाण एक ऐसी तलवार है जो भक्तों के संकट को एक वार में काट देती है। यदि आपका विश्वास अडिग है, तो बजरंगबली स्वयं आपकी रक्षा के लिए दौड़े चले आएंगे।

आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन के हर ‘अधर्म’ को मिटाकर ‘धर्म और विजय’ लाएगी। कमेंट में “जय बजरंगबली” ज़रूर लिखें!