Durga Chalisa Lyrics

श्री दुर्गा चालीसा (Shri Durga Chalisa Lyrics): अर्थ, महत्व और पूजन की सम्पूर्ण विधि

प्रस्तावना: नमो नमो दुर्गे सुख करनी… जय माता दी! हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है, जो दुष्टों का संहार और भक्तों का कल्याण करती हैं। मार्कण्डेय पुराण पर आधारित ‘श्री दुर्गा चालीसा’ माँ के दिव्य स्वरूप और उनकी शक्तियों का गुणगान करती है। मान्यता है कि जो भक्त नित्य नियम से दुर्गा चालीसा का पाठ करता है, उसे जीवन में किसी भी प्रकार का भय, बाधा या शत्रु परेशान नहीं कर पाते। माँ दुर्गा की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको माँ दुर्गा चालीसा के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इसके चमत्कारी लाभों के बारे में भी जानकारी देंगे।


1. श्री दुर्गा चालीसा (Full Lyrics in Hindi)

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

दोहा:

नमो नमो दुर्गे सुख करनी, नमो नमो अम्बे दुःख हरनी। निरंकार है ज्योति तुम्हारी, तिहुँ लोक फैली उजियारी॥

चौपाई: शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लय कीन्हा। पालन हेतु अन्न धन दीन्हा॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिव शंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण करत स्तुति नाहीं॥

क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥

मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुखदाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥

केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजे। जाको देख काल डर भाजे॥

दोहा:

शरणागत हुई कीर्ति बखानी, जय जय जय जगदम्ब भवानी। भक्ति शक्ति बल बुद्धि दे, करहुं कल्याण हमार॥


दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शशि ललाट मुख महाविशाला ।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥

रूप मातु को अधिक सुहावे ।
दरश करत जन अति सुख पावे ॥ ४

तुम संसार शक्ति लै कीना ।
पालन हेतु अन्न धन दीना ॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला ।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें ।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥ ८

रूप सरस्वती को तुम धारा ।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा ।
परगट भई फाड़कर खम्बा ॥

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो ।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं ।
श्री नारायण अंग समाहीं ॥ १२

क्षीरसिन्धु में करत विलासा ।
दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
महिमा अमित न जात बखानी ॥

मातंगी अरु धूमावति माता ।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥

श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ १६

केहरि वाहन सोह भवानी ।
लांगुर वीर चलत अगवानी ॥

कर में खप्पर खड्ग विराजै ।
जाको देख काल डर भाजै ॥

सोहै अस्त्र और त्रिशूला ।
जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥

नगरकोट में तुम्हीं विराजत ।
तिहुँलोक में डंका बाजत ॥ २०

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे ।
रक्तबीज शंखन संहारे ॥

महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥

रूप कराल कालिका धारा ।
सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब ।
भई सहाय मातु तुम तब तब ॥ २४

अमरपुरी अरु बासव लोका ।
तब महिमा सब रहें अशोका ॥

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
तुम्हें सदा पूजें नरनारी ॥

प्रेम भक्ति से जो यश गावें ।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई ।
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई ॥ २८

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥

शंकर आचारज तप कीनो ।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥

शक्ति रूप का मरम न पायो ।
शक्ति गई तब मन पछितायो ॥ ३२

शरणागत हुई कीर्ति बखानी ।
जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा ।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥

मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥

आशा तृष्णा निपट सतावें ।
मोह मदादिक सब बिनशावें ॥ ३६

शत्रु नाश कीजै महारानी ।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥

करो कृपा हे मातु दयाला ।
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला ॥

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ॥

श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै ।
सब सुख भोग परमपद पावै ॥ ४०

देवीदास शरण निज जानी ।
कहु कृपा जगदम्ब भवानी ॥

॥दोहा॥

शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक ।
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक ॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा ॥

2. माँ दुर्गा पूजन और चालीसा पाठ की सही विधि

माँ दुर्गा की पूजा में ‘शुद्धता’ और ‘श्रद्धा’ सबसे महत्वपूर्ण है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:

  1. शुभ समय: सुबह स्नान के बाद या शाम को संध्या वंदना के समय। शुक्रवार और अष्टमी/नवमी के दिन पाठ करना विशेष फलदायी है।

  2. स्थापना: माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को लाल कपड़ा बिछी चौकी पर स्थापित करें।

  3. दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और सुगंधित धूप/अगरबत्ती का प्रयोग करें।

  4. प्रिय वस्तुएं: माँ को लाल फूल (गुड़हल या गुलाब), लाल चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।

  5. भोग: माता को हलवा-पूरी या बताशे का भोग लगाएं।


💡 सम्बंधित लेख: इन्हें भी ज़रूर पढ़ें


3. श्री दुर्गा चालीसा के 15+ चमत्कारी लाभ (Benefits)

नियमित रूप से माँ दुर्गा की चालीसा पढ़ने से ये लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. शत्रु विजय: गुप्त शत्रुओं और विरोधियों का प्रभाव समाप्त होता है।

  2. भय से मुक्ति: मन का अनजाना डर और घबराहट दूर होती है।

  3. नकारात्मक ऊर्जा का नाश: घर से बुरी शक्तियों और वास्तु दोष का प्रभाव मिटता है।

  4. सुख-समृद्धि: घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

  5. मानसिक शक्ति: विपरीत परिस्थितियों में लड़ने का साहस मिलता है।

  6. ग्रह दोष शांति: विशेषकर राहू और केतु के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।

  7. संतान सुख: माँ की कृपा से गुणी संतान की प्राप्ति होती है।

  8. आरोग्य: शारीरिक बीमारियों और पुराने रोगों में लाभ मिलता है।

  9. अकाल मृत्यु से रक्षा: माँ का कवच भक्त की हर संकट से रक्षा करता है।

  10. सफलता: नौकरी और व्यापार में आ रही अड़चनें दूर होती हैं।

  11. विवाह बाधा: विवाह में आ रही देरी और रुकावटें समाप्त होती हैं।

  12. पाप मुक्ति: जाने-अनजाने हुए पापों का बोझ कम होता है।

  13. मान-सम्मान: समाज में पद-प्रतिष्ठा और मान बढ़ता है।

  14. मोक्ष: अंत काल में सद्गति और माँ के चरणों में स्थान मिलता है।

  15. दिव्य सुरक्षा: साधक के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बन जाता है।


4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या दुर्गा चालीसा का पाठ रात में कर सकते हैं? जी हाँ, रात के समय (विशेषकर नवरात्रि में) किया गया पाठ अधिक शक्तिशाली माना जाता है।

Q2. क्या पीरियड्स के दौरान महिलाएं पाठ कर सकती हैं? शास्त्रों के अनुसार, अशुद्ध अवस्था में शारीरिक पूजा वर्जित है, लेकिन आप मानसिक रूप से माँ का ध्यान कर सकती हैं।

Q3. पाठ के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है? माँ दुर्गा के लिए मंगलवार और शुक्रवार विशेष दिन माने गए हैं।


5. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: दुर्गा चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में ‘सिद्ध कुंजिका स्तोत्र’ का पाठ ज़रूर करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप पाठ के समय अपने पास एक कलश में जल रखते हैं और पाठ के बाद उस जल को पूरे घर में छिड़कते हैं, तो घर की सारी नकारात्मकता तुरंत समाप्त हो जाती है। माँ को ‘इत्र’ चढ़ाना और उस इत्र को स्वयं लगाना सौभाग्य में वृद्धि करता है।”


6. निष्कर्ष: शक्ति का आधार है माँ

श्री दुर्गा चालीसा हमारे भीतर की सोई हुई शक्ति को जगाने का माध्यम है। माँ दुर्गा करुणा की सागर हैं, जो अपने भक्त को कभी निराश नहीं करतीं।

आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन के सारे कष्टों को हर लेगी। कमेंट में “जय माता दी” ज़रूर लिखें!