प्रस्तावना: जय कपीस तिहुं लोक उजागर… जय श्री राम! जय हनुमान! गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा केवल एक धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि यह एक ‘महामंत्र’ है। इसकी 40 चौपाइयों में वह शक्ति है जो असंभव को भी संभव बना सकती है। चाहे मन में डर हो, सेहत खराब हो या जीवन में बड़ी अड़चनें आ रही हों, हनुमान चालीसा का पाठ हर समस्या का अचूक समाधान है।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको हनुमान चालीसा के शुद्ध लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही उनका सरल अर्थ भी समझाएंगे ताकि आप इसे केवल पढ़ें नहीं, बल्कि महसूस भी कर सकें।


1. श्री हनुमान चालीसा (सम्पूर्ण लिरिक्स)

|| दोहा ||

 

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार॥

|| चौपाई ||

 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

संकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥

विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचन्द्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये। श्री रघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्ध साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥

|| दोहा ||

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥


2. हनुमान चालीसा की चौपाइयों का गुप्त अर्थ

पाठकों को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि ये पंक्तियाँ सिर्फ कविता नहीं हैं:

  • “नासै रोग हरै सब पीरा…”: यह चौपाई स्वास्थ्य के लिए है। इसका निरंतर जाप करने से शरीर की बीमारियाँ दूर होती हैं।

  • “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता…”: इसका अर्थ है कि हनुमान जी के पास दुनिया की हर सुख-सुविधा देने की शक्ति है।

  • “भूत पिसाच निकट नहिं आवै…”: यह मानसिक शांति और डर को दूर करने के लिए अचूक है।


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3. हनुमान चालीसा पाठ करने के नियम (The Rules)

यदि आप Pujapath.net पर बताए गए इन नियमों का पालन करते हैं, तो हनुमान जी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं:

  1. शुद्धता: पाठ से पहले स्नान अनिवार्य है। मंगलवार और शनिवार को लाल कपड़े पहनना शुभ होता है।

  2. दीपक: पाठ के समय चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं।

  3. आसन: कभी भी सीधे जमीन पर बैठकर पाठ न करें, ऊनी या कुश के आसन का प्रयोग करें।

  4. सात्विकता: पाठ करने वाले व्यक्ति को मांसाहार और नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।


4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या हनुमान चालीसा का पाठ रात में कर सकते हैं? हाँ, रात में पाठ करने से मन के अनजाने डर खत्म होते हैं और गहरी नींद आती है।

Q2. क्या महिलाएं हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं? बिल्कुल! हनुमान जी सबके पिता और रक्षक हैं। महिलाएं श्रद्धापूर्वक पाठ कर सकती हैं, बस प्रतिमा का स्पर्श न करें।

Q3. 100 बार पाठ करने का क्या महत्व है? “जो सत बार पाठ कर कोई” के अनुसार, 100 बार पाठ करने से व्यक्ति बड़े से बड़े संकट या जेल (बंधी) से मुक्त हो जाता है।


5. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में प्रभु श्री राम और माता सीता की आरती ज़रूर करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि जहाँ राम नाम का संकीर्तन होता है, वहां हनुमान जी बिना बुलाए ही उपस्थित हो जाते हैं। पाठ के बाद हनुमान जी को तुलसी का पत्ता ज़रूर चढ़ाएं, क्योंकि बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते।”


6. निष्कर्ष: बजरंगबली की शरण में

हनुमान चालीसा पढ़ना एक दिव्य अनुभव है। यह हमें सिखाता है कि शक्ति और विनम्रता एक साथ कैसे रह सकते हैं। यदि आप इसे अपनी दिनचर्या बना लेते हैं, तो सफलता आपके कदम चूमेगी।

आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को ‘मंगलमय’ बनाएगी। कमेंट में “जय बजरंगबली” लिखकर अपनी श्रद्धा प्रकट करें!