श्री नर्मदा चालीसा (Shri Narmada Chalisa Lyrics): अर्थ, महत्व और पूजन की सम्पूर्ण विधि

प्रस्तावना: नमामि देवी नर्मदे… जय माँ नर्मदा! हिंदू धर्म में नर्मदा जी को ‘पुण्यसलिला’ कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार, गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह माँ नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। नर्मदा जी भगवान शिव के पसीने से प्रकट हुई हैं, इसलिए इन्हें ‘शिव-पुत्री’ भी कहा जाता है। माँ नर्मदा का हर कंकड़ ‘शंकर’ माना जाता है। उनकी चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में शीतलता, पवित्रता और समृद्धि लेकर आता है।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको श्री नर्मदा चालीसा के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इसके पाठ से होने वाले चमत्कारी लाभों के बारे में भी विस्तार से बताएंगे।


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1. श्री नर्मदा चालीसा का आध्यात्मिक महत्व (Significance)

श्री नर्मदा चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष या पितृ दोष होता है, उनके लिए नर्मदा जी की आराधना विशेष फलदायी होती है। माँ नर्मदा का स्वभाव बहुत ही कोमल और ममतामयी है, इसलिए उनकी चालीसा का पाठ करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है।


2. श्री नर्मदा चालीसा (Full Lyrics in Hindi)

भक्तों, माँ नर्मदा का ध्यान करते हुए इस चालीसा का पाठ करें:


॥ दोहा ॥


देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥

इनकी सेवा से सदा, मिटते पाप महान।
तट पर कर जप दान नर, पाते हैं नित ज्ञान ॥

॥ चौपाई ॥


जय-जय-जय नर्मदा भवानी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
अमरकण्ठ से निकली माता, सर्व सिद्धि नव निधि की दाता।

कन्या रूप सकल गुण खानी, जब प्रकटीं नर्मदा भवानी।
सप्तमी सुर्य मकर रविवारा, अश्वनि माघ मास अवतारा।

वाहन मकर आपको साजैं, कमल पुष्प पर आप विराजैं।
ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं, तब ही मनवांछित फल पावैं।

दर्शन करत पाप कटि जाते, कोटि भक्त गण नित्य नहाते।
जो नर तुमको नित ही ध्यावै, वह नर रुद्र लोक को जावैं।

मगरमच्छा तुम में सुख पावैं, अंतिम समय परमपद पावैं।
मस्तक मुकुट सदा ही साजैं, पांव पैंजनी नित ही राजैं।

कल-कल ध्वनि करती हो माता, पाप ताप हरती हो माता।
पूरब से पश्चिम की ओरा, बहतीं माता नाचत मोरा।

शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं, सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं।
शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं, सकल देव गण तुमको ध्यावैं।

कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे, ये सब कहलाते दु:ख हारे।
मनोकमना पूरण करती, सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं।

कनखल में गंगा की महिमा, कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा।
पर नर्मदा ग्राम जंगल में, नित रहती माता मंगल में।

एक बार कर के स्नाना, तरत पिढ़ी है नर नारा।
मेकल कन्या तुम ही रेवा, तुम्हरी भजन करें नित देवा।

जटा शंकरी नाम तुम्हारा, तुमने कोटि जनों को है तारा।
समोद्भवा नर्मदा तुम हो, पाप मोचनी रेवा तुम हो।

तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई, करत न बनती मातु बड़ाई।
जल प्रताप तुममें अति माता, जो रमणीय तथा सुख दाता।

चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी, महिमा अति अपार है तुम्हारी।
तुम में पड़ी अस्थि भी भारी, छुवत पाषाण होत वर वारि।

यमुना मे जो मनुज नहाता, सात दिनों में वह फल पाता।
सरस्वती तीन दीनों में देती, गंगा तुरत बाद हीं देती।

पर रेवा का दर्शन करके मानव फल पाता मन भर के।
तुम्हरी महिमा है अति भारी, जिसको गाते हैं नर-नारी।

जो नर तुम में नित्य नहाता, रुद्र लोक मे पूजा जाता।
जड़ी बूटियां तट पर राजें, मोहक दृश्य सदा हीं साजें|

वायु सुगंधित चलती तीरा, जो हरती नर तन की पीरा।
घाट-घाट की महिमा भारी, कवि भी गा नहिं सकते सारी।

नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा, और सहारा नहीं मम दूजा।
हो प्रसन्न ऊपर मम माता, तुम ही मातु मोक्ष की दाता।

जो मानव यह नित है पढ़ता, उसका मान सदा ही बढ़ता।
जो शत बार इसे है गाता, वह विद्या धन दौलत पाता।

अगणित बार पढ़ै जो कोई, पूरण मनोकामना होई।
सबके उर में बसत नर्मदा, यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ।

॥ दोहा ॥


भक्ति भाव उर आनि के, जो करता है जाप।
माता जी की कृपा से, दूर होत संताप॥

॥ इति श्री नर्मदा चालीसा समाप्त ॥

3. माँ नर्मदा पूजन और चालीसा पाठ की विधि

नर्मदा जी की पूजा में सादगी और श्रद्धा का महत्व है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:

  1. शुभ समय: सुबह स्नान के बाद या शाम को सूर्यास्त के समय। पूर्णिमा और नर्मदा जयंती पर पाठ करना विशेष फलदायी है।

  2. स्थापना: माँ नर्मदा की तस्वीर या माँ के प्रतीक स्वरूप एक लोटा जल सामने रखें।

  3. दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं। माँ को सफेद फूल और सफेद मिठाई (मिश्री-मखाने) का भोग लगाएं।

  4. परिक्रमा: यदि संभव हो, तो घर में ही माँ की मूर्ति की तीन बार परिक्रमा करें।

  5. मंत्र: चालीसा के बाद “ॐ नमो नर्मदायै” मंत्र का 108 बार जाप करें।


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4. श्री नर्मदा चालीसा के 15+ चमत्कारी लाभ (Benefits)

नियमित रूप से माँ रेवा की चालीसा पढ़ने से ये लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. पाप मुक्ति: अनजाने में हुए पापों के बोझ से मुक्ति मिलती है।

  2. मानसिक शीतलता: क्रोध और चिड़चिड़ेपन में कमी आती है।

  3. पितृ दोष शांति: पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

  4. आर्थिक बरकत: घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।

  5. कालसर्प दोष निवारण: राहु-केतु के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

  6. पवित्र विचार: मन में सात्विक और सकारात्मक विचारों का जन्म होता है।

  7. रोग मुक्ति: विशेषकर जल से संबंधित रोगों और चर्म रोगों में लाभ मिलता है।

  8. कृषि में लाभ: किसानों के लिए नर्मदा जी की आराधना फसलों की उन्नति लाती है।

  9. भय का अंत: जल भय और अकाल मृत्यु का डर समाप्त होता है।

  10. सद्बुद्धि: माँ नर्मदा की कृपा से व्यक्ति सही मार्ग चुनता है।

  11. पारिवारिक सामंजस्य: घर के सदस्यों में जल की तरह शीतलता और प्रेम बढ़ता है।

  12. कार्यों में सिद्धि: रुके हुए सरकारी या सामाजिक कार्य पूरे होते हैं।

  13. नेत्र ज्योति: माँ के दर्शन और चालीसा से आंखों की रोशनी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

  14. मोक्ष की प्राप्ति: जीवन के अंत में सद्गति प्राप्त होती है।

  15. प्राकृतिक जुड़ाव: व्यक्ति प्रकृति और नदियों के संरक्षण के प्रति जागरूक होता है।


5. पाठ के दौरान क्या न करें? (Don’ts)

  • नदी में प्रदूषण: यदि आप नदी तट पर पाठ कर रहे हैं, तो नदी में साबुन, पॉलिथीन या कचरा न डालें।

  • अशुद्धता: माँ नर्मदा को स्वच्छता प्रिय है, इसलिए गंदे वस्त्रों में पाठ न करें।

  • निंदा: किसी की बुराई न करें, मन को शांत रखें।


6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या घर में नर्मदा जी की चालीसा पढ़ना फलदायी है? जी बिल्कुल! यदि आप नदी तट पर नहीं जा सकते, तो घर में जल कलश के सामने पाठ करना भी उतना ही फलदायी है।

Q2. क्या महिलाएं यह चालीसा पढ़ सकती हैं? हाँ, महिलाएं माँ नर्मदा की प्रिय पुत्रियाँ मानी गई हैं, वे पूरी श्रद्धा से पाठ कर सकती हैं।

Q3. ‘नर्मदाष्टकम’ और ‘नर्मदा चालीसा’ में क्या अंतर है? नर्मदाष्टकम आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रचित संस्कृत स्तोत्र है, जबकि चालीसा सरल हिंदी में माँ की स्तुति है। दोनों ही प्रभावशाली हैं।


7. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: श्री नर्मदा चालीसा का पाठ करने के बाद माँ नर्मदा की आरती ‘ओम जय जगदानंदी’ ज़रूर गाएं। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप पाठ के समय अपने पास एक तांबे के पात्र में जल भरकर रखते हैं और पाठ के बाद उस जल को पूरे घर में छिड़कते हैं, तो घर की नकारात्मक ऊर्जा तुरंत समाप्त हो जाती है। शनिवार के दिन नर्मदा जी के नाम से दीपदान करने से शनि दोष शांत होता है।”


8. निष्कर्ष: माँ रेवा की अनंत कृपा

श्री नर्मदा चालीसा केवल एक पाठ नहीं है, बल्कि यह माँ के चरणों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका है। माँ नर्मदा अपने भक्तों को कभी खाली हाथ नहीं लौटने देतीं।

आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को ‘निर्मल और पावन’ बनाएगी। कमेंट में “नर्मदे हर” ज़रूर लिखें!