🌞 आज का हिन्दू पंचांग 🌞 06 नवम्बर 2022 (Aaj ka Panchang)

🌞 आज का पंचांग 🌞 दिनांक – 06 नवम्बर 2022


दिनांक – 06 नवम्बर 2022
दिन – रविवार
विक्रम संवत् – 2079
शक संवत् – 1944
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमंत
मास – कार्तिक
पक्ष – शुक्ल
तिथि – त्रयोदशी शाम 04:28 तक तत्पश्चात चतुर्दशी
नक्षत्र – रेवती रात्रि 12:04 तक तत्पश्चात अश्विनी
योग – वज्र रात्रि 11:50 तक तत्पश्चात सिद्धि
⛅राहु काल – शाम 04:35 से 05:59 तक
⛅सूर्योदय – 06:47
सूर्यास्त – 05:59
दिशा शूल – पश्चिम दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:05 से 05:56 तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 11:58 से 12:49 तक
व्रत पर्व विवरण
विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है ।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

कार्तिक मास के अंतिम तीन दिन
( 06, 07 एवं 08 नवम्बर 2022 )

*🌹 कार्तिक मास की त्रयोदशी से पूनम तक के अंतिम तीन दिन पुण्यमयी तिथियाँ मानी जाती हैं । इनका बड़ा विशेष प्रभाव माना गया है ।

अगर कोई कार्तिक मास के सभी दिन स्नान नहीं कर पाये तो उसे अंतिम तीन दिन सुबह सूर्योदय से तनिक पहले स्नान कर लेने से सम्पूर्ण कार्तिक मास के प्रातः स्नान के पुण्यों की प्राप्ति कही गयी है जैसे कहीं अनजाने में जूठा खा लिया है तो उस दोष को निवृत्त करने के लिए बाद में आँवला, बेर या गन्ना चबाया जाता है ।

इससे उस दोष से आदमी मुक्त होता है, बुद्धि स्वस्थ हो जाती है । जूठा खाने से बुद्धि मारी जाती है । जूठे हाथ सिर पर रखने से बुद्धि मारी जाती है, कमजोर होती है ।

इसी प्रकार दोषों के शमन और भगवदभक्ति की प्राप्ति के लिए कार्तिक के अंतिम तीन दिन प्रातः स्नान, श्रीविष्णुसहस्रनाम’ और ‘गीता’ पाठ विशेष लाभकारी है । आप इनका फायदा उठाना । -पूज्य बापूजी*

🔹रविवार विशेष🔹


  • रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
  • रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)
  • रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)
  • रविवार सूर्यदेव का दिन है, इस दिन क्षौर (बाल काटना व दाढ़ी बनवाना) कराने से धन, बुद्धि और धर्म की क्षति होती है ।
  • रविवार को आँवले का सेवन नहीं करना चाहिए ।
  • स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए । इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं ।
  • रविवार के दिन पीपल के पेड़ को स्पर्श करना निषेध है ।
  • रविवार के दिन तुलसी पत्ता तोड़ना वर्जित है ।

आयुर्वेद के श्रेष्ठ आचार्य श्री वाग्भट्टजी द्वारा वर्णित कुछ प्रयोग


  • अस्थिरोग: जिनकी अस्थियाँ जकड़ गयी हों, टूट गयी हों, टेढ़ी-मेढ़ी हो गयी हों अथवा जिनकी अस्थियों में पीड़ा होती हो, उनके लिए शीत ऋतु में लहसुन का उचित मात्रा में सेवन बहुत लाभदायी है.

    लहसुन के छिलके उतारकर रात को खट्टी छाछ में भिगोकर रखें । सुबह धोके पीसकर रस निकालें । एक से चार ग्राम रस में उतना ही तिल का तेल अथवा घी मिलाकर पियें । आहार सात्त्विक, सुपाच्य लें ।*

    सावधानी : लहसुन तामसी होने के कारण रुग्णावस्था में भी इसका सेवन औषधवत् करना चाहिए ।

    वातव्याधि : १०-१५ तुलसी के पत्ते, १ या २ काली मिर्च व १०-१५ ग्राम गाय का घी मिलाकर खाने से वातव्याधि में लाभ होता है ।

    खाँसी : आधा चम्मच तुलसी का रस और उतना ही अदरक का रस मिलाकर लेने से लाभ होता है ।