प्रस्तावना: चिंता को हरने वाली, माँ चिंतपूर्णी… जय माता दी! हिमाचल की शिवालिक पहाड़ियों के बीच विराजमान माता चिंतपूर्णी का मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ सती माता के चरणों का हिस्सा गिरा था। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है—’चिंतपूर्णी’, यानी वह देवी जो अपने भक्तों की सभी चिंताओं को पूर्णतः समाप्त कर देती हैं। माता के चरणों में श्रद्धा से शीश झुकाने और उनकी आरती का गान करने से जीवन में सुख और संतोष का संचार होता है।
आज Pujapath.net के इस लेख में हम माता चिंतपूर्णी की प्रसिद्ध आरती और उनके पावन धाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहे हैं।
1. श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती (Lyrics in Hindi)
आरती:
चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,
जग को तारो भोली माँ
जन को तारो भोली माँ,
काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥
॥ भोली माँ ॥
सिन्हा पर भाई असवार,
भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥
॥ भोली माँ ॥
एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा,
तीजे त्रिशूल सम्भालो ॥
॥ भोली माँ ॥
चौथे हाथ चक्कर गदा,
पाँचवे-छठे मुण्ड़ो की माला ॥
॥ भोली माँ ॥
सातवे से रुण्ड मुण्ड बिदारे,
आठवे से असुर संहारो ॥
॥ भोली माँ ॥
चम्पे का बाग़ लगा अति सुन्दर,
बैठी दीवान लगाये ॥
॥ भोली माँ ॥
हरी ब्रम्हा तेरे भवन विराजे,
लाल चंदोया बैठी तान ॥
॥ भोली माँ ॥
औखी घाटी विकटा पैंडा,
तले बहे दरिया ॥
॥ भोली माँ ॥
सुमन चरण ध्यानु जस गावे,
भक्तां दी पज निभाओ ॥
॥ भोली माँ ॥
चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,
जग को तारो भोली माँ
2. माता चिंतपूर्णी पूजन और आरती की सही विधि
देवी की आराधना में सात्विकता और श्रद्धा का विशेष महत्व है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:
-
समय: माता की आरती सुबह (मंगला आरती) और शाम को की जाती है। नवरात्रि और सावन के मेले में इस आरती का महत्व और भी बढ़ जाता है।
-
भोग: माता को हलवा, काले चने और नारियल का भोग अत्यंत प्रिय है।
-
दीपक: शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। कपूर के साथ आरती करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
-
लाल चुनरी: माता को लाल रंग की चुनरी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
-
जयकारा: आरती के पश्चात “बोल सांचे दरबार की जय” और “जय माता चिंतपूर्णी” का जयकारा लगाएं।
💡 सम्बंधित लेख: इन्हें भी ज़रूर पढ़ें
-
श्री हनुमान चालीसा लिरिक्स (Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi): अर्थ और सम्पूर्ण पाठ विधि
-
[लक्ष्मी मंत्र और पूजन विधि] – घर में सुख-समृद्धि लाने के अचूक उपाय।
3. माता की आरती और दर्शन के लाभ (Benefits)
-
चिंताओं से मुक्ति: जैसा नाम है, माँ हर प्रकार की मानसिक और सांसारिक चिंताओं को हर लेती हैं।
-
ग्रह दोष निवारण: विशेषकर राहु और केतु के अशुभ प्रभाव माता की पूजा से शांत होते हैं।
-
रोग मुक्ति: शारीरिक कष्टों और असाध्य बीमारियों में माता का आशीर्वाद संजीवनी का काम करता है।
-
आर्थिक संपन्नता: रुके हुए काम पूरे होते हैं और व्यापार में उन्नति मिलती है।
-
संतान सुख: जो दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं, उनके लिए यह दरबार अत्यंत फलदायी है।
-
भय का नाश: शत्रुओं का भय और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. माता चिंतपूर्णी का मंदिर कहाँ स्थित है? माता का मंदिर हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित है। यह पंजाब की सीमा के काफी करीब है।
Q2. माता को ‘छिन्नमस्तिका’ क्यों कहा जाता है? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ देवी ने अपना शीश काटकर अपनी दो योगिनियों की क्षुधा शांत की थी, इसलिए इन्हें छिन्नमस्तिका भी कहा जाता है।
Q3. यहाँ कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है? श्रद्धालु मुख्य रूप से नारियल, मिसरी, मखाने और मेवा का प्रसाद चढ़ाते हैं।
5. विशेष सुझाव
“विशेष सुझाव: माता चिंतपूर्णी की आरती के बाद ‘वराह कवच’ या ‘देवी कवच’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप माता के दरबार की पवित्र मौली (कलावा) को अपने गले या हाथ में बांधते हैं, तो यह आपकी हर संकट से रक्षा करती है। नवरात्रि के दौरान माता को ‘लाल गुलाब’ अर्पित करने से अटकी हुई मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी होती हैं।”
6. निष्कर्ष: हर दु:ख की दवा है माँ का द्वार
माता चिंतपूर्णी की आरती केवल शब्द नहीं, बल्कि विश्वास की एक डोरी है जो भक्त को शक्ति से जोड़ती है। यदि मन में विश्वास हो, तो माँ पहाड़ चढ़कर आए भक्त को कभी खाली हाथ नहीं भेजतीं।
आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपकी सभी चिंताओं को दूर कर सुख-समृद्धि लाएगी। कमेंट में “जय माता चिंतपूर्णी” ज़रूर लिखें!

महेंद्र कौशिक
Founder & Content Writer, PujaPath.net
📍 भारत | ✍️ 2022 से लिख रहे हैं
🕉️ वैदिक परंपरा
📖 भक्ति साहित्य
🌸 हिंदी लेखन
🔱 धार्मिक कंटेंट
🐚 बंगाली पूजा
✍️ मेरे बारे में
नमस्ते! मैं महेंद्र कौशिक हूँ — एक ऐसा इंसान जो बचपन से धर्म और भक्ति में डूबा रहा। मेरी दादी माँ हर सुबह 4 बजे उठकर पूजा करती थीं, और उनकी उस दिनचर्या ने मुझ पर जो छाप छोड़ी, वो आज तक है।
पढ़ाई और काम के साथ-साथ मैंने हमेशा यह महसूस किया कि इंटरनेट पर हिंदी में सही और विश्वसनीय धार्मिक जानकारी ढूंढना बहुत मुश्किल है। या तो जानकारी बहुत कठिन भाषा में होती है, या अधूरी होती है। तभी मैंने 2022 में PujaPath.net शुरू किया।
“मेरा लक्ष्य है — हर घर में पूजा-पाठ की सही जानकारी पहुँचे, चाहे वो गाँव में हो या शहर में, बुजुर्ग हों या युवा।”
🎯 विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
📿
आरती और चालीसा
सभी प्रमुख देवी-देवताओं की आरतियाँ और चालीसा — सही उच्चारण और अर्थ के साथ।
🔔
पूजा विधि
घर पर आसानी से की जाने वाली पूजा विधियाँ — step-by-step जानकारी।
🌺
वैदिक मंत्र
प्राचीन मंत्रों का अर्थ, जप विधि और उनके आध्यात्मिक महत्व की व्याख्या।
🐚
बंगाली भक्ति सामग्री
মন্ত্র, চালিশা, পুজো পদ্ধতি — বাংলায় সঠিক এবং বিশ্বাসযোগ্য তথ্য।
📚 Research और Sources
मैं हर article लिखने से पहले:
प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रों का अध्ययन करता हूँ
अपने परिवार के बड़े-बुजुर्गों और जानकारों से जानकारी लेता हूँ
अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं को ध्यान में रखता हूँ
सरल हिंदी में लिखता हूँ ताकि हर कोई समझ सके
📬 मुझसे बात करें
अगर आप किसी पूजा के बारे में कुछ पूछना चाहते हैं, कोई suggestion देना चाहते हैं, या बस अपनी भक्ति की बात share करना चाहते हैं — मुझे बहुत खुशी होगी:
📧 Email: [email protected]
🌐 Website: Contact Page
🙏 हर हर महादेव! जय श्री राम!







