प्रस्तावना: ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् । जय माँ गायत्री! हिंदू धर्म में गायत्री माता को ज्ञान, विज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वेदों का सार ‘गायत्री मंत्र’ में समाहित है और जो भक्त ‘श्री गायत्री चालीसा’ का श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसकी बुद्धि शुद्ध होती है और जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। माता गायत्री ब्रह्मा, विष्णु और महेश—तीनों की शक्ति का पुंज हैं।
आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको श्री गायत्री चालीसा के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इसके पाठ से होने वाले आध्यात्मिक लाभ और सही विधि के बारे में विस्तार से बताएंगे।
1. श्री गायत्री चालीसा का आध्यात्मिक महत्व (Significance)
गायत्री चालीसा का पाठ करने से साधक के भीतर ‘सत्व गुण’ और ‘विवेक’ जागृत होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में नहीं लगता या जिनकी वाणी में दोष है, उनके लिए गायत्री चालीसा का पाठ रामबाण है। यह पाठ कुंडली के सूर्य और गुरु ग्रह को मजबूती प्रदान करता है, जिससे समाज में मान-सम्मान और यश बढ़ता है। माँ गायत्री की कृपा से व्यक्ति भ्रम के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ता है।
2. श्री गायत्री चालीसा (Shri Gayatri Chalisa Lyrics)
भक्तों, वेदमता गायत्री का ध्यान करते हुए इस चालीसा का पाठ करें:
॥ दोहा ॥
हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड ।
शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥
जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम ।
प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम ॥
॥ चालीसा ॥
भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।
गायत्री नित कलिमल दहनी ॥१॥
अक्षर चौबिस परम पुनीता ।
इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता ॥
शाश्वत सतोगुणी सतरुपा ।
सत्य सनातन सुधा अनूपा ॥
हंसारुढ़ सितम्बर धारी ।
स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी ॥४॥
पुस्तक पुष्प कमंडलु माला ।
शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥
ध्यान धरत पुलकित हिय होई ।
सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई ॥
कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।
निराकार की अदभुत माया ॥
तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।
तरै सकल संकट सों सोई ॥८॥
सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।
दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥
तुम्हरी महिमा पारन पावें ।
जो शारद शत मुख गुण गावें ॥
चार वेद की मातु पुनीता ।
तुम ब्रहमाणी गौरी सीता ॥
महामंत्र जितने जग माहीं ।
कोऊ गायत्री सम नाहीं ॥१२॥
सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।
आलस पाप अविघा नासै ॥
सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।
काल रात्रि वरदा कल्यानी ॥
ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते ।
तुम सों पावें सुरता तेते ॥
तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे ।
जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥१६॥
महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।
जै जै जै त्रिपदा भय हारी ॥
पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।
तुम सम अधिक न जग में आना ॥
तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।
तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा ॥
जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई ।
पारस परसि कुधातु सुहाई ॥२०॥
तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।
माता तुम सब ठौर समाई ॥
ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे ।
सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥
सकलसृष्टि की प्राण विधाता ।
पालक पोषक नाशक त्राता ॥
मातेश्वरी दया व्रत धारी ।
तुम सन तरे पतकी भारी ॥२४॥
जापर कृपा तुम्हारी होई ।
तापर कृपा करें सब कोई ॥
मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें ।
रोगी रोग रहित है जावें ॥
दारिद मिटै कटै सब पीरा ।
नाशै दुःख हरै भव भीरा ॥
गृह कलेश चित चिंता भारी ।
नासै गायत्री भय हारी ॥२८ ॥
संतिति हीन सुसंतति पावें ।
सुख संपत्ति युत मोद मनावें ॥
भूत पिशाच सबै भय खावें ।
यम के दूत निकट नहिं आवें ॥
जो सधवा सुमिरें चित लाई ।
अछत सुहाग सदा सुखदाई ॥
घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।
विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥३२॥
जयति जयति जगदम्ब भवानी ।
तुम सम और दयालु न दानी ॥
जो सदगुरु सों दीक्षा पावें ।
सो साधन को सफल बनावें ॥
सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी ।
लहैं मनोरथ गृही विरागी ॥
अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता ।
सब समर्थ गायत्री माता ॥३६॥
ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी ।
आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी ॥
जो जो शरण तुम्हारी आवें ।
सो सो मन वांछित फल पावें ॥
बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ ।
धन वैभव यश तेज उछाऊ ॥
सकल बढ़ें उपजे सुख नाना ।
जो यह पाठ करै धरि ध्याना ॥४०॥
॥ दोहा ॥
यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय ।
तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ॥
3. गायत्री माता पूजन और चालीसा पाठ की विधि
गायत्री पूजा में ‘मानसिक पवित्रता’ का विशेष महत्व है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:
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शुभ समय: इसके पाठ के लिए ब्रह्म-मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) सबसे उत्तम है। सूर्योदय के समय भी इसका पाठ बहुत फलदायी होता है।
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स्थापना: माँ गायत्री की हंसारूढ़ तस्वीर के सामने बैठें। आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
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दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और चंदन की अगरबत्ती का प्रयोग करें।
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प्रसाद: माता को पीले फल या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
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मंत्र जप: चालीसा के बाद गायत्री मंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः…) का कम से कम 108 बार जप करना अनिवार्य है।
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[लक्ष्मी मंत्र और पूजन विधि] – ज्ञान के साथ वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए।
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4. श्री गायत्री चालीसा के 15+ चमत्कारी लाभ (Benefits)
नियमित रूप से माँ गायत्री की चालीसा पढ़ने से ये लाभ प्राप्त होते हैं:
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प्रखर बुद्धि: याददाश्त बढ़ती है और सीखने की शक्ति में सुधार होता है।
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आत्मविश्वास: व्यक्ति के भीतर से डर और झिझक खत्म होती है।
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मानसिक शांति: क्रोध, चिंता और ईर्ष्या जैसे दोष दूर होते हैं।
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ग्रह शांति: कुंडली में सूर्य ग्रह की मजबूती से सरकारी कार्यों में सफलता मिलती है।
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वाणी में माधुर्य: व्यक्ति की वाणी प्रभावशाली और सत्यनिष्ठ बनती है।
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स्वास्थ्य लाभ: नेत्र ज्योति बढ़ती है और रक्त का संचार शुद्ध होता है।
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नकारात्मकता का नाश: घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र हो जाता है।
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ज्ञान का उदय: वेदों और शास्त्रों को समझने की शक्ति आती है।
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पाप मुक्ति: जाने-अनजाने में हुए वैचारिक पापों का नाश होता है।
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सफलता: प्रतियोगिता परीक्षाओं में विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है।
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आध्यात्मिक प्रगति: साधक की कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होने में मदद मिलती है।
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सौभाग्य: जीवन में आने वाली अड़चनें स्वतः ही दूर होने लगती हैं।
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दुष्ट संगति से बचाव: व्यक्ति बुरे व्यसनों और कुसंगति से दूर रहता है।
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वंश वृद्धि: घर में गुणी और संस्कारी संतान का जन्म होता है।
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मोक्ष का मार्ग: अंततः आत्मा को परम शांति और सद्गति मिलती है।
5. पाठ के दौरान क्या न करें? (Don’ts)
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अशुद्ध आचरण: गायत्री साधना के दौरान झूठ बोलना और क्रोध करना वर्जित है।
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तामसिक भोजन: मांस, मदिरा और लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
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अनादर: किसी भी धर्मग्रंथ या विद्वान व्यक्ति का अपमान न करें।
6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या गायत्री चालीसा का पाठ केवल जनेऊधारी ही कर सकते हैं? नहीं, गायत्री माता सबकी माँ हैं। कोई भी व्यक्ति जो शुद्ध मन और शरीर से उनकी शरण में जाना चाहता है, वह पाठ कर सकता है।
Q2. क्या महिलाएं गायत्री चालीसा पढ़ सकती हैं? जी बिल्कुल! गायत्री माता स्वयं एक देवी हैं, महिलाएं पूरी श्रद्धा और अधिकार के साथ उनका पाठ कर सकती हैं।
Q3. गायत्री मंत्र और चालीसा में क्या अंतर है? मंत्र वेदों का बीज है, जबकि चालीसा माता की लीलाओं और शक्तियों का सरल हिंदी में गुणगान है। दोनों का मेल सर्वोत्तम है।
7. विशेष सुझाव
“विशेष सुझाव: गायत्री चालीसा का पाठ करने के बाद तांबे के पात्र में रखे जल का आचमन करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप पाठ के समय अपने सामने एक कलश में जल रखते हैं और पाठ के बाद उस जल को तुलसी के पौधे में अर्पित करते हैं, तो आपकी बुद्धि में विलक्षण परिवर्तन आने लगता है। रविवार के दिन गाय को गुड़ और रोटी खिलाना गायत्री साधना को पूर्ण बनाता है।”
8. निष्कर्ष: ज्ञान ही परम प्रकाश है
श्री गायत्री चालीसा हमें सिखाती है कि संसार की सबसे बड़ी शक्ति ‘विवेक’ है। जब हमारी बुद्धि शुद्ध होती है, तो हमें हर समस्या का समाधान मिल जाता है। माँ गायत्री का आशीर्वाद हर अंधकार को मिटा सकता है।
आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को ‘ज्योतिर्मय’ बना देगी। कमेंट में “जय माँ गायत्री” ज़रूर लिखें!

महेंद्र कौशिक –
धार्मिक लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर
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