Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics

श्री हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics): विधि और 15+ अद्भुत लाभ

प्रस्तावना: आरती कीजै हनुमान लला की… जय श्री राम! जय बजरंगबली! हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को ‘संकटमोचन’ कहा गया है। वे शक्ति, भक्ति और अटूट स्वामी-भक्ति के प्रतीक हैं। हनुमान जी की आरती का गान न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। मान्यता है कि जो भक्त नित्य प्रेमपूर्वक हनुमान जी की आरती करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश हो जाता है।

आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध आरती और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहे हैं।


1. श्री हनुमान जी की आरती (Lyrics in Hindi)

 

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

2. हनुमान जी की आरती और पूजन की सही विधि

हनुमान जी की पूजा में ‘नियम’ और ‘शुद्धता’ का बड़ा महत्व है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:

  1. शुभ समय: सुबह स्नान के बाद या शाम को संध्या वंदना के समय। मंगलवार और शनिवार को आरती करना विशेष फलदायी है।

  2. दीपक: हनुमान जी की आरती के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का दीपक उत्तम माना जाता है। दीपक में कपूर डालकर आरती करना और भी शुभ है।

  3. प्रसाद: आरती के बाद हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

  4. पुष्प: उन्हें लाल रंग के फूल (जैसे गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें।

  5. जयकारा: आरती के बाद “सियावर रामचंद्र की जय” और “पवनसुत हनुमान की जय” का उद्घोष करें।


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3. हनुमान आरती के 15+ चमत्कारी लाभ (Benefits)

नियमित रूप से हनुमान जी की आरती करने से ये लाभ प्राप्त होते हैं:

  1. भय का नाश: मन से हर प्रकार का अनजाना डर और घबराहट दूर होती है।

  2. नकारात्मकता से सुरक्षा: घर में भूत-प्रेत या बुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं रहता।

  3. साहस की प्राप्ति: व्यक्ति में कठिन चुनौतियों का सामना करने का साहस आता है।

  4. रोग मुक्ति: शारीरिक बीमारियों और पुराने दर्द में राहत मिलती है।

  5. शनि दोष शांति: शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या का बुरा प्रभाव कम होता है।

  6. कर्ज से मुक्ति: आर्थिक तंगी दूर होती है और फँसा हुआ धन मिलने के योग बनते हैं।

  7. मानसिक शांति: मन स्थिर होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

  8. ग्रह दोष निवारण: मंगल, राहु और केतु जैसे ग्रहों की अशुभता समाप्त होती है।

  9. बुरी आदतों से दूरी: व्यक्ति व्यसनों और कुसंगति के मार्ग को त्याग देता है।

  10. सुख-समृद्धि: घर में सुख और शांति का वातावरण बना रहता है।

  11. आत्मविश्वास: हीन भावना दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

  12. रुके हुए कार्य: भगवान की कृपा से अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं।

  13. संतान की रक्षा: परिवार और बच्चों पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं।

  14. पाप मुक्ति: जाने-अनजाने हुए पापों का बोझ कम होता है।

  15. मोक्ष का मार्ग: अंत समय में सद्गति और भगवान के चरणों में स्थान मिलता है।


4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या हनुमान जी की आरती खड़े होकर करनी चाहिए? हाँ, आरती हमेशा खड़े होकर और श्रद्धाभाव के साथ करनी चाहिए।

Q2. क्या महिलाएं हनुमान आरती कर सकती हैं? बिल्कुल, महिलाएं पूरी श्रद्धा से आरती कर सकती हैं, बस उन्हें मूर्ति को स्पर्श करने से बचना चाहिए।

Q3. आरती के समय कपूर का उपयोग क्यों होता है? कपूर की लौ से वातावरण शुद्ध होता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।


5. विशेष सुझाव

“विशेष सुझाव: हनुमान जी की आरती के बाद ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ ज़रूर करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप आरती के समय सिंदूर का तिलक लगाते हैं, तो आपका तेज और ओज बढ़ता है। शनिवार के दिन आरती के बाद पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना हनुमान जी और शनि देव दोनों को प्रसन्न करता है।”


6. निष्कर्ष: संकटमोचन की शरण

हनुमान जी की आरती हमें सिखाती है कि भक्ति में वह शक्ति है जो बड़े से बड़े संकट को टाल सकती है। जब हम निस्वार्थ भाव से आरती गाते हैं, तो बजरंगबली स्वयं हमारी रक्षा के लिए खड़े हो जाते हैं।

आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को मंगलमयी बनाएगी। कमेंट में “जय बजरंगबली” ज़रूर लिखें!

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