प्रस्तावना: शान्ताकारं भुजगशयनं… जय श्री हरि! हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को ‘जगत्पालक’ माना गया है, जो इस संसार का संचालन और रक्षा करते हैं। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान विष्णु विभिन्न अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं। उनकी स्तुति के लिए ‘श्री विष्णु चालीसा’ का पाठ सबसे सरल और उत्तम मार्ग है। मान्यता है कि जो भक्त एकाग्रचित्त होकर इस चालीसा का गायन करता है, उस पर लक्ष्मीपति की कृपा सदैव बनी रहती है।
आज Pujapath.net के इस विशेष लेख में हम आपको श्री विष्णु चालीसा के सम्पूर्ण लिरिक्स हिंदी में प्रदान कर रहे हैं, साथ ही इसके चमत्कारी लाभ और पाठ करने के नियमों के बारे में भी विस्तार से चर्चा करेंगे।
1. श्री विष्णु चालीसा का आध्यात्मिक महत्व (Significance)
श्री विष्णु चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के भीतर ‘सत्व गुण’ की वृद्धि होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में गुरु (बृहस्पति) ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए विष्णु चालीसा का पाठ किसी वरदान से कम नहीं है। यह पाठ आर्थिक तंगी को दूर करने, पारिवारिक क्लेश शांत करने और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए अचूक माना जाता है। विष्णु जी की आराधना से न केवल भौतिक सुख मिलते हैं, बल्कि अंत में परम पद की प्राप्ति भी होती है।
2. श्री विष्णु चालीसा (Full Lyrics in Hindi)
भक्तों, विष्णु चालीसा का पाठ करते समय भगवान के चतुर्भुज स्वरूप का ध्यान करें, जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित हैं:
॥ दोहा ॥
विष्णु सुनिए विनय,सेवक की चितलाय।
कीरत कुछ वर्णन करूँ,दीजै ज्ञान बताय॥
॥ चौपाई ॥
नमो विष्णु भगवान खरारी।
कष्ट नशावन अखिल बिहारी॥
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी।
त्रिभुवन फैल रही उजियारी॥
सुन्दर रूप मनोहर सूरत।
सरल स्वभाव मोहनी मूरत॥
तन पर पीताम्बर अति सोहत।
बैजन्ती माला मन मोहत॥
शंख चक्र कर गदा बिराजे।
देखत दैत्य असुर दल भाजे॥
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे।
काम क्रोध मद लोभ न छाजे॥
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन।
दनुज असुर दुष्टन दल गंजन॥
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन।
दोष मिटाय करत जन सज्जन॥
पाप काट भव सिन्धु उतारण।
कष्ट नाशकर भक्त उबारण॥
करत अनेक रूप प्रभु धारण।
केवल आप भक्ति के कारण॥
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा।
तब तुम रूप राम का धारा॥
भार उतार असुर दल मारा।
रावण आदिक को संहारा॥
आप वाराह रूप बनाया।
हिरण्याक्ष को मार गिराया॥
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया।
चौदह रतनन को निकलाया॥
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया।
रूप मोहनी आप दिखाया॥
देवन को अमृत पान कराया।
असुरन को छबि से बहलाया॥
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया।
मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया॥
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया।
भस्मासुर को रूप दिखाया॥
वेदन को जब असुर डुबाया।
कर प्रबन्ध उन्हें ढुँढवाया॥
मोहित बनकर खलहि नचाया।
उसही कर से भस्म कराया॥
असुर जलंधर अति बलदाई।
शंकर से उन कीन्ह लड़ाई॥
हार पार शिव सकल बनाई।
कीन सती से छल खल जाई॥
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी।
बतलाई सब विपत कहानी॥
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी।
वृन्दा की सब सुरति भुलानी॥
देखत तीन दनुज शैतानी।
वृन्दा आय तुम्हें लपटानी॥
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी।
हना असुर उर शिव शैतानी॥
तुमने धुरू प्रहलाद उबारे।
हिरणाकुश आदिक खल मारे॥
गणिका और अजामिल तारे।
बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे॥
हरहु सकल संताप हमारे।
कृपा करहु हरि सिरजन हारे॥
देखहुँ मैं निज दरश तुम्हारे।
दीन बन्धु भक्तन हितकारे॥
चहत आपका सेवक दर्शन।
करहु दया अपनी मधुसूदन॥
जानूं नहीं योग्य जप पूजन।
होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन॥
शीलदया सन्तोष सुलक्षण।
विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण॥
करहुँ आपका किस विधि पूजन।
कुमति विलोक होत दुख भीषण॥
करहुँ प्रणाम कौन विधिसुमिरण।
कौन भांति मैं करहुँ समर्पण॥
सुर मुनि करत सदा सिवकाई।
हर्षित रहत परम गति पाई॥
दीन दुखिन पर सदा सहाई।
निज जन जान लेव अपनाई॥
पाप दोष संताप नशाओ।
भव बन्धन से मुक्त कराओ॥
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ।
निज चरनन का दास बनाओ॥
निगम सदा ये विनय सुनावै।
पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै॥
3. श्री विष्णु पूजन और चालीसा पाठ की सही विधि
विष्णु पूजा में शुद्धता और सात्विकता का बहुत महत्व है। Pujapath.net की इस विधि का पालन करें:
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शुभ समय: सुबह स्नान के बाद या शाम को संध्या आरती के समय। गुरुवार (Thursday) और एकादशी की तिथि को पाठ करना विशेष फलदायी है।
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स्थापना: भगवान विष्णु या उनके अवतार (राम, कृष्ण) की प्रतिमा के सामने बैठें। संभव हो तो विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी की भी तस्वीर रखें।
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वस्त्र: पाठ के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि पीला रंग श्री हरि को अत्यंत प्रिय है।
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दीपक: शुद्ध घी का दीपक जलाएं और चंदन की अगरबत्ती का प्रयोग करें।
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नैवेद्य: भगवान को पीले रंग की मिठाई, ऋतु फल और तुलसी दल अर्पित करें। याद रखें, बिना तुलसी के विष्णु जी भोग ग्रहण नहीं करते।
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4. श्री विष्णु चालीसा के 15+ चमत्कारी लाभ (Benefits)
नियमित और श्रद्धा से इस चालीसा का पाठ करने से ये फल मिलते हैं:
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आर्थिक स्थिरता: घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और अनावश्यक खर्च रुकते हैं।
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पारिवारिक सुख: घर के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और कलह समाप्त होता है।
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ज्ञान की प्राप्ति: गुरु ग्रह की मजबूती से व्यक्ति की बुद्धि प्रखर होती है।
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संतान सुख: उत्तम संतान की प्राप्ति और संतान की उन्नति के लिए यह पाठ फलदायी है।
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ग्रह दोष शांति: विशेषकर बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।
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भय का नाश: अकाल मृत्यु और अनजाने डर से मुक्ति मिलती है।
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मानसिक शांति: मन के बुरे विचार और चिंताएं दूर होती हैं।
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आरोग्य: पुरानी बीमारियों में सुधार होता है और शरीर ऊर्जावान बनता है।
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शत्रु विजय: गुप्त शत्रु आपका अहित नहीं कर पाते।
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सौभाग्य में वृद्धि: जीवन में अच्छे अवसर और सफलता मिलने लगती है।
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आत्मविश्वास: व्यक्ति में धर्म की राह पर चलने का साहस आता है।
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पापों का शमन: जाने-अनजाने में हुए अपराधों का दोष मिटता है।
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रुके हुए कार्य: कानूनी या सामाजिक अड़चनें दूर होती हैं।
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मोक्ष का मार्ग: जीवन के अंत में हरि चरणों में स्थान प्राप्त होता है।
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पवित्र ओरा: व्यक्ति का प्रभाव समाज में बढ़ता है और लोग उसका सम्मान करते हैं।
5. विशेष सावधानियां (Don’ts)
महेंद्र जी, पाठकों के लिए यह हिस्सा बहुत महत्वपूर्ण है:
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तुलसी का महत्व: विष्णु जी की पूजा में कभी भी तुलसी का पत्ता तोड़कर न चढ़ाएं यदि वह रविवार या एकादशी का दिन है (पहले से तोड़कर रखें)।
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तामसिकता: पाठ के दिन मांस, मदिरा और लहसुन-प्याज का पूरी तरह त्याग करें।
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क्रोध: पाठ के दौरान और बाद में किसी का अपमान न करें।
6. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या महिलाएं विष्णु चालीसा पढ़ सकती हैं? जी हाँ, महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ विष्णु चालीसा पढ़ सकती हैं। यह उनके वैवाहिक जीवन के लिए बहुत शुभ होता है।
Q2. क्या केवल गुरुवार को ही पाठ करना चाहिए? नहीं, आप इसे प्रतिदिन अपनी सुबह की पूजा में शामिल कर सकते हैं, लेकिन गुरुवार को इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
Q3. पाठ के बाद जल का क्या करें? पाठ के समय सामने रखे जल को पूरे घर में छिड़कें और बाकी जल प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
7. विशेष सुझाव
“विशेष सुझाव: श्री विष्णु चालीसा का पाठ करने के बाद अंत में ‘विष्णु सहस्रनाम’ का श्रवण या पाठ ज़रूर करें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि यदि आप गुरुवार के दिन पाठ के बाद किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को केले या पीली वस्तु का दान करते हैं, तो आपकी बड़ी से बड़ी मनोकामना बहुत जल्दी पूरी होती है। ध्यान रखें, पूजा में ‘अक्षत’ (चावल) के स्थान पर साबुत ‘हल्दी’ या ‘पीले फूल’ का प्रयोग करना अधिक शुभ होता है।”
8. निष्कर्ष: जगत के पालनहार का सहारा
श्री विष्णु चालीसा हमें सिखाती है कि जब हम ईश्वर के शरणागत होते हैं, तो वे हमारे जीवन की नाव को हर मझधार से पार लगा देते हैं। श्री हरि की भक्ति ही इस कलियुग में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
आशा है कि Pujapath.net की यह जानकारी आपके जीवन को ‘नारायणमय’ बना देगी। कमेंट में “जय श्री हरि विष्णु” ज़रूर लिखें!

महेंद्र कौशिक
Founder & Content Writer, PujaPath.net
📍 भारत | ✍️ 2022 से लिख रहे हैं
📖 भक्ति साहित्य
🌸 हिंदी लेखन
🔱 धार्मिक कंटेंट
🐚 बंगाली पूजा
✍️ मेरे बारे में
नमस्ते! मैं महेंद्र कौशिक हूँ — एक ऐसा इंसान जो बचपन से धर्म और भक्ति में डूबा रहा। मेरी दादी माँ हर सुबह 4 बजे उठकर पूजा करती थीं, और उनकी उस दिनचर्या ने मुझ पर जो छाप छोड़ी, वो आज तक है।
पढ़ाई और काम के साथ-साथ मैंने हमेशा यह महसूस किया कि इंटरनेट पर हिंदी में सही और विश्वसनीय धार्मिक जानकारी ढूंढना बहुत मुश्किल है। या तो जानकारी बहुत कठिन भाषा में होती है, या अधूरी होती है। तभी मैंने 2022 में PujaPath.net शुरू किया।
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- प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रों का अध्ययन करता हूँ
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